काशी अश्वमेध यज्ञ और बलि का अश्व

काशी अश्वमेध यज्ञ और बलि का अश्व

Arvind3राजनीतिक पण्डित कहते हैं कि चुनाव 2014 के रूप में काशी में एक अन्य अश्वमेध यज्ञ आयोजित किया जा रहा है। अपनी राज्य पताका फहराने के बाद मोदी नामक सम्राट यहाँ अश्वमेध यज्ञ कर रहा है। सम्राट को अपने यज्ञ के लिए एक अश्व की जरूरत थी तो कुछ लोगों ने जबरदस्ती उस आदमी को भेज दिया जो स्वयँ अपने हाथ में सम्राटत्व की पर्ची उठाए घूम रहा था। वह आदमी वैकल्पिक सम्राट होने का दम भरता था पर हालात ने उसे यज्ञ बलि की वेदी पर पहुँचा दिया।

यह सब कैसे हुआ?

यह सब किसने किया?

आओ देखते हैं . . .

 दिल्ली चुनावों की अप्रत्याशित सफलता ने AAP के लोगों के दिमागों में हवा भर दी। उस सफलता को वे लोग संभाल नहीं पाए और ऊटपटाँग काम करने लगे। उन्होंने दिल्ली में तोड़फोड़ करके अपनी सरकार गिराई और भारत का राजपाट सँभालने के लिये लोकसभा की ओर चल पड़े।

इन लोगों ने करनाल में रैली की। रैली तो खैर क्या थी पाँच सात सौ लोगों की सभा थी। वहाँ ये सब AAP वाले जोश में भर उठे और इनमें से जो सज्जन अति स्वस्थ प्रकृति वाले हैं पहलवानी आचरण जिन्हें भाता है और जोश बहुत आता है उन्होंने AAP के धनुर्धर इन चीफ श्रीमान केजरीवाल के विषय में घोषणा कर दी कि यदि मोदी वाराणसी से चुनाव लड़ते हैं तो केजरीवाल जी भी वहीं से चुनाव लड़ेंगे।

उनके पूरे राजनीतिक जीवन में शायद यह पहली पारी होगी जिसमें उनकी पराजय पहले से ही सुनिश्चित है। कल बैंगलोर में बोलते हुए उन्होंने कहा भी है कि जब मैं दोबारा दिल्ली का मुख्यमंत्री बनूँगा तो बीच में रह गए कामों को पूरा करूँगा। यानी कि उन्हें पता है कि बनारस से हारकर ही दिल्ली वापिस जाना है।

बनारस की हार के बाद क्या केजरी अपनी खोई हुई श्रीप्रतिष्ठा को वापिस ले पाएँगे? बनारस से हारकर लौटा हुआ आदमी क्या दिल्ली की जनता के सामने अपनी पूर्ववर्ती छवि बना पाएगा? क्या एक हतप्रभ AAP नेता दिल्ली की जनता का विश्वास जीत पाएगा? यदि नहीं तो यह स्पष्ट होना चाहिये के बनारस के इस कुएँ में केजरी ने खुद छलाँग लगाई है या किसी ने पीछे से धक्का दिया है

क्या AAP में कुछ ऐसे लोग आ गये हैं जो केजरी को दिल्ली के मुख्यमंत्रित्व से दूर रखना चाहते हैं? इसी लिये उन्हें एक ऐसी रणभूमि में भेज दिया गया है कि जहाँ वो ना तो जीतने के पराक्रम को दिखा पाएँगे और ना ही उन्हें हारने वाली वीरगति ही प्राप्त हो पाएगी।

तो क्या इतना बड़ा अघोर कर्म करने वाला पण्डित केजरीवाल अब राजनीतिक प्रेतयोनि में जीते रहने को अभिशप्त होगा? या फिर दिल्ली साम्राज्य की सम्पूर्ण अखण्डता का यह मोदी यज्ञ किसी केजरी नामक अश्व की बलि के साथ समपन्नता को प्राप्त होगा? क्या AAP के लोगों ने केजरीवाल के गले में बलि पर चढ़ने से पूर्व खुद ही पुष्पमाल डाल दी है?

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http://psmalik.wordpress.com/2014/03/17/kashi-yagya/

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