शस्त्र उठाओ मोदी जी

शस्त्र उठाओ मोदी जी

modi-ji

जब आपने चुनावों में वादा किया कि अच्छे दिन आने वाले हैं तो भारत की जनता ने मान लिया था कि यकीनन अब अच्छे दिन आने वाले हैं।

आपकी सरकार ने भी कदम उठाने शुरू कर दिये हैं। आप की तरफ़ से भी घोषणा कर दी गई है कि देश को कुछ कड़े कदमों के लिये तैयार रहना चाहिये। उम्मीद है कि अब टैक्स बढ़ा दिये जाएँगे, सब्सिडी कम कर दी जाएगी, पैट्रोल-डीजल के दाम बढ़ा दिये जाएँगे, जनता हाहाकार करने लगेगी, पुलिस उन्हें दबाने के लिए इस्तेमाल की जाएगी और तब तक अगले चुनाव आ जाएँगे।

परन्तु यही सब तो पुरानी सरकारों के समय भी होता था। तब इसमें अलग क्या हुआ? क्या इसी तरह अच्छे दिनों को लाया जाने वाला है? इस से तो जनता में भयानक निराशा पैदा होगी।

पहला पत्र

  • आज भारतीय राष्ट्र-राज्य के सामने मुख्य चुनौती आर्थिक है। विदेशी कर्ज़ का सँकट है, उत्पादन घट गया है, काला धन घूसखोर नौकरशाहों, बिचौलियों और बिल्डरों की तिजोरियों में बँद है, जवाबदेही अपने न्यूनतम स्तर पर है, कानून-व्यवस्था का डर लगभग खत्म हो चुका है, पुलिस बेलगाम हो उठी है, न्याय का वितरण मनमाने तरीके से हो रहा है ।
  • इस दुष्चक्र से निकलने के लिए पहला और सबसे जरूरी विकल्प उत्पादन को बढ़ाना है। इसके लिए करों Taxes को ना बढ़ाया जाए। लोगों से श्रमदान यानी कि श्रम का दान करवाया जाए।
  • जो जहाँ है वहीं से देश-प्रहरी बन कर कर्म में जुट जाए। काम के घंटे बढ़ाए, काम की गुणवत्ता बढ़ाए, काम का दायरा बढ़ाए। उत्पादन प्रति व्यक्ति बढ़ाए। जनता का पैसा नहीं छीना गया बल्कि जनता ने स्वतः ही श्रम का योगदान दिया।
  • जिनके पास काम नहीं है उनके लिये काम सृजित किया जाए। सरकार के लुटेरे विभागों जैसे – एक्साईज़, आयकर, प्रोविडैन्ट फँड, श्रम, ईएसआईसी(ESIC) जैसे उत्पीड़क विभागों पर लगाम कसी जानी चाहिए। इन विभागों के बाबू और अफ़सर मिलकर कर उगाही और जनता के कल्याण के नाम पर देश के उद्योगों को चौपट कर रहे हैं।
  • सन् 2014 के मूल्यों के आधार पर 200 करोड़ रुपये से कम टर्न-ओवर वाले उद्योगों को इन विभागों से पूरी छूट दी जाए और 1000 करोड़ रुपये तक के टर्न-ओवर वाले उद्योगों के लिए इन विभागों से बहुत सरल नियम बनाए जाने चाहियें।
  • सन् 2014 के मूल्यों के आधार पर पाँच व्यक्तियों के एक सामान्य परिवार को अपने लिये गरिमामय जीवन यापन के लिए कम से कम पचास हजार रुपये हर महीने चाहिए। अतः छः लाख तक की वार्षिक आय पर किसी प्रकार का कर नहीं लगाया जाना चाहिये। इससे अधिक की आय पर भी कराधान अत्यँत स्नेहिल ही होना चाहिये।
  • सवाल है कि तब इन सब कामों को करने के लिए धन कहाँ से आएगा।
  • अब सन् 1970-75 के वे दिन नहीं हैं जब गरीबों के उत्थान के लिए धनवानों को गाली देना जरूरी था। आज धनवानों को गरियाने से कुछ हासिलनहीं होगा। धनवान इसी भारतीय समाज के हिस्से हैं वो हमारे ही हैं।
  • वो भी विकास को वैसे ही चाहते हैं जैसे समाज के दूसरे वर्ग चाहते हैं। आज समय उनसे बैर करने का नहीं उनसे सहारा लेने का है। आज आपको नया नारा देना होगा जिससे धन और धनवान दोनों आगे आएँ। नए भारत के निर्माण के लिये।
  • एक ऐसे कोष की स्थापना की जा सकती है जहाँ जमाकर्ता से उसके स्रोत पर प्रश्न ना किये जाएँ। स्विस बैंको की तर्ज़ पर कोई भी व्यक्ति कितनी भी रकम जमा करवाए। कोई भी बँदिश ना लगाई जाए।
  • ऐसे जमाकर्ताओं से इस सेवा के बदले कुछ बहुत मामूली सा शुल्क लिया जा सकता है। उनसे कहा जा सकता है कि वे अपनी रकम को एक न्यूनतम अवधि जैसे कि एक या दो साल तक ना निकालें।
  • एक छोटी सी सावधानी यह भी रखनी होगी कि यह धन निकासी के बाद सीधा ही भारतीय बाजार में ना उतारा जा सके। इससे महँगाई बढ़ सकती है। इसका भुगतान किसी दूसरे रूप में जैसे सोने के माध्यम से या हार्ड कैश के रूप में किया जा सकता है।
  • कुल निष्कर्ष वही है जो आपने नारा दिया था – मिनिमम गवर्न्मैन्ट एण्ड मैक्सिमम गवर्नैंस।

अब आप अपने शस्त्र उठा ही लीजियेमोदी जी! राष्ट्र निर्माण का युद्ध शुरू हो चुका है;

THIS ARTICLE IS AVAILABLE AT

http://psmalik.com/charcha/227-shashtra-uthao-modi

http://worldview.psmalik.com/shashtra-uthao-modi/

Advertisements

Leave a Reply

Fill in your details below or click an icon to log in:

WordPress.com Logo

You are commenting using your WordPress.com account. Log Out / Change )

Twitter picture

You are commenting using your Twitter account. Log Out / Change )

Facebook photo

You are commenting using your Facebook account. Log Out / Change )

Google+ photo

You are commenting using your Google+ account. Log Out / Change )

Connecting to %s

%d bloggers like this: